दिव्या के साथ पूरा समय बिताया

एक दिन मैं अपनी क्लास में बैठा हुआ था मेरे बगल में आकर एक लड़का बैठा उससे मेरी बात होने लगी तो हम दोनों का परिचय भी होने लगा था उसका नाम शुभम है। शुभम और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे कि तभी प्रोफेसर आ गए और क्लास में सब लोगों से उन्होंने परिचय लिया। उस दिन ज्यादा बच्चे नहीं थे लेकिन हम लोग एक दूसरे को पहचानने लगे थे। पहले दिन ही हम लोगो की अच्छी बातचीत हो गयी थी उस दिन ज्यादा पढ़ाई नहीं हुई और कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। जब पहली बार मैंने अपनी क्लास में दिव्या को देखा तो मुझे उसे देखकर काफी अच्छा लगा और कहीं ना कहीं मैं दिव्या को प्यार भी करने लगा था यह बात मैंने शुभम को भी बता दी थी और शुभम ने मेरी इसमे काफी मदद की।

वह दिव्या के साथ अच्छे से बात किया करता था जिस कारण मेरी भी अब दिव्या से बात होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे थे। दिव्या और मैं जब भी साथ में होते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। एक दिन दिव्या का जन्मदिन था उस दिन उसने मुझे और शुभम को अपने बर्थडे पार्टी में इनवाइट किया। हम लोग जब उसकी बर्थडे पार्टी में गए तो हम लोगों को बड़ा ही अच्छा लगा हम लोग बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस तरीके से हम लोगों ने दिव्या के बर्थडे पार्टी में एंजॉय किया। उस दिन जब हम लोग घर लौटे तो दिव्या ने हम लोगों को फोन किया और कहा कि तुम लोग बहुत जल्दी घर चले गए। मैंने दिव्या को कहा कि मुझे घर इसलिए जल्दी जाना पड़ा क्योंकि  मुझे अगले दिन सुबह पापा और मम्मी के साथ जयपुर निकलना था जिस वजह से मैं घर जल्दी आ गया था और शुभम भी मेरे साथ जल्दी घर निकल गया था। अगले दिन हम लोग जयपुर के लिए निकल चुके थे और मेरी बात दिव्या से सिर्फ फोन पर ही हो पाती थी।

मैं दिव्या से जब भी बातें करता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता दिव्या को भी बड़ा अच्छा लगता था जब भी वह मुझसे बातें किया करती। दिव्या और मैं एक दूसरे से बातें करते थे मैं दिव्या से प्यार करने लगा था यह बात मैंने दिव्या को बताने की ठान ली थी और मैं दिव्या को इस बारे में बताना चाहता था। हम लोगों के कॉलेज का पहला वर्ष खत्म हो चुका था और हम कॉलेज के सेकंड ईयर में चले गए थे मैं चाहता था कि मैं दिव्या को सब कुछ बता दूँ इसलिए एक दिन मैंने फैसला किया कि मैं दिव्या को सब कुछ बता दूंगा। उस दिन मैंने दिव्या से अपने दिल की बात कह डाली, मैंने जब दिव्या से अपने दिल की बात कही तो वह बड़ी खुश हुई और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था। दिव्या और मैं एक दूसरे से प्यार करने लगे थे और हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में थे जो हम दोनों के लिए बड़ा ही अच्छा था। जिस तरीके से मैं और दिव्या एक दूसरे के साथ रिलेशन में थे अब कहीं ना कहीं हम लोगों के बीच प्यार की दीवार और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी हम दोनों का प्यार और भी ज्यादा गहरा होता जा रहा था।

समय बीतने के साथ साथ हम लोगों का ग्रेजुएशन भी पूरा हो गया और हम लोगों के रिलेशन को भी काफी लंबा समय हो चुका था लेकिन हम दोनों के बीच हमेशा ही  सब कुछ ठीक चल रहा था। हम दोनों के बीच में काफी बातें होती थी हालांकि मैं अभी भी पुणे में ही पढ़ाई कर रहा था और दिव्या नागपुर पढ़ाई करने के लिए चली गई थी। दिव्या अपनी बड़ी बहन के साथ ही नागपुर में रहती है और मैं अभी भी पुणे में ही था मेरी बात दिव्या से फोन पर ही हो पाती थी लेकिन हम लोग कभी कबार मिल भी लिया करते थे। जब भी मैं दिव्या को मिलने के लिए जाता तो मुझे काफी अच्छा लगता मैं कई बार उसे मिलने के लिए नागपुर चला जाया करता था और जब मैं दिव्या को मिलता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। शुभम और मेरी मुलाकात अभी भी होती रहती थी उसने अपने पापा का बिजनेस ज्वाइन कर लिया था और वह अपने पापा के साथ बिजनेस कर रहा था। मेरी शुभम से मुलाकात हो ही जाया करती थी। जब भी मेरी मुलाकात शुभम से होती तो हम दोनों को काफी अच्छा लगता और वह मुझसे हमेशा ही दिव्या के बारे में पूछा करता।

काफी समय हो गया था मैं भी दिव्या को मिला नहीं था एक दिन मैंने दिव्या से मिलने की बात कही तो वह मुझे कहने लगी मैं तुमसे जल्द ही मिलने के लिए आऊंगी लेकिन वह मुझसे अभी तक मुलाकात नहीं कर पाई थी। उसकी तबीयत भी ठीक नहीं थी और उसके कॉलेज में उसको प्रोजेक्ट सबमिट भी करना था इसलिए हम दोनों की मुलाकात नहीं हो पाई थी। मेरी बात दिव्या से होती ही रहती थी और उस दिन जब हम दोनों फोन पर बातें कर रहे थे तो मैंने दिव्या को कहा कि मैं तुमसे मिलना चाहता हूं तो दिव्या ने मुझे कहा कि मैं दो दिनों के बाद पुणे आ रही हूं। मैं यह बात सुनकर बड़ा खुश हो गया और दिव्या से दो दिन के बाद मैं मिलने वाला था। दो दिन के बाद जब दिव्या पुणे आई तो हम दोनों की मुलाकात हुई और हम दोनों बड़े ही खुश थे जिस तरीके से हम दोनों इतने समय बाद मिले थे। उस दिन हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा टाइम बिताया और उसके बाद दिव्या अपने घर चली गई थी और मैं अपने घर लौट आया था। रात भर हम दोनों ने फोन पर बातें की और हम दोनों की फोन पर काफी बातें हुई। दिव्या कुछ दिनों तक तो पुणे में ही रहने वाली थी इसलिए हम लोगों की मुलाकात होती ही रहती थी।

जब हम दोनों एक दूसरे को मिले तो उस दिन दिव्या और मैं बड़े ही खुश थे। मैंने दिव्या से रोमांटिक बातें की और वह बड़ी खुश थी क्योंकि हम दोनों के बीच मे पहले भी कई बार सेक्स की बाते तो हो ही चुकी थी लेकिन मैं चाहता था मैं दिव्या के साथ सेक्स संबध बना लूं। दिव्या ने मुझे कहा अगर तुम्हे मेरे साथ सेक्स करना है तो हम लोगों को आज कहीं बाहर ही रुकना चाहिए। दिव्या का भी बहुत ज्यादा मन था वह मेरे साथ सेक्स करे। हम दोनों की रजामंदी से उस दिन हम दोनों बाहर ही रूके। जब उस दिन दिव्या मेरे साथ बिस्तर में लेटी हुई थी तो वह बहुत ही ज्यादा खुश थी। मैं उसके बदन को महसूस कर रहा था और वह मेरे बदन को महसूस कर रही थी हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही है मैंने अपने कपड़े उतार दिए। जब मैं दिव्या के गुलाबी होठों का रसपान करने लगा तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगने लगा था और दिव्या को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी।

मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने दिव्या से कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। दिव्या और मैं एक दूसरे को अच्छे से किस कर रहे थे जिसके बाद मैंने दिव्या की गर्मी को बहुत ही  ज्यादा बढा दिया चुकी था वह पूरी तरीके से गरम हो गई थी। मैंने जब अपने लंड को बहार निकलकर हिलाना शुरु किया तो दिव्या ने उसे देखते ही हाथो मे ले लिया और हिलाना शुरु कर दिया। वह मेरे लंड को जिस तरीके से हिलाने लगी उससे मुझे मजा आने लगा था मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और वह उसे चूसने लगी। जब वह मेरे लंड को संकिग करने लगी तो मुझे मजा आने लगा था और दिव्या को भी मजा आ रहा था जिस तरीके से वह मेरी गर्मी को बढ़ा रही थी। उसने बहुत देर तक मेरे लझड को सकिंग किया वह उत्तेजित हो गई। मैंने उसके बदन से कपड़े उतार कर उसके गोरे और सुडौल स्तनों को चूसना शुरू किया तो उसके स्तनों से मुझे गर्मी महसूस होने लगी थी।

अब वह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी वह बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाते ही अंदर की तरफ डालना शुरू किया। जैसे ही मेरा लंड दिव्या की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह बहुत जोर से चिल्ला कर मुझे कहने लगी मुझे मजा आने लगा है। मै दिव्या को बड़ी तेज गति से चोद रहा था वह जोर से चिल्ला रही थी मैंने दिव्या को कहा मुझे मजा आ रहा है। दिव्या भी मुझे कहने लगी मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है लेकिन दिव्या की योनि से खून बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैं समझ चुका था दिव्या बिल्कुल भी रह नहीं पाएंगी। मैं उसे और भी तेजी से धक्के मारने लगा था उसकी सिसकारियो में बढ़ोतरी होती जा रही थी। उसकी गर्म सिसकारियां मुझे और भी ज्यादा गर्म कर रही थी मेरी गर्मी इतनी बढ रही थी मेरे धक्को में और भी तेजी आती जा रही थी और मैं उसे बड़ी तेज गति से चोदे जा रहा था। मैंने दिव्या को बहुत ही ज्यादा तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए थे।

जब मैंने दिव्या की चूत पर प्रहार करना शुरू किया तो दिव्या खुश होने लगी थी और मुझे कहने लगी मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। हम दोनों बहुत ज्यादा खुश हो चुके थे अब मैं और दिव्या साथ में जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। दिव्या की सिसकारियां बढ रही थी लेकिन मुझे भी एहसास हो चुका था अब मैं ज्यादा देर तक दिव्या के सामने टिक नहीं पाऊंगा इसलिए मैंने उसकी चूत में वीर्य की पिचकारी को गिराकर उसकी इच्छा को पूरा कर दिया। मेरा वीर्य दिव्या की योनि में गिरते ही उसकी इच्छा पूरी हो गई और वह खुश हो गई थी। जिस तरीके से हमने साथ में सेक्स संबंध बनाए थे हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ पहली रात को रंगीन बना दिया।

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