हर्षिता को घोड़ी बना दिया

मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहा था तो सोचा कि जीतेन्द्र को फोन कर लूं। मैंने जीतेन्द्र को फोन किया और जब मैंने जीतेन्द्र को फोन किया तो जीतेन्द्र मुझे कहने लगा कि आज तुमने मुझे कैसे याद कर लिया। मैंने जीतेन्द्र को कहा कि बस ऐसे ही सोच रहा था कि काफी दिनों से तुमसे बात नहीं हो पाई है तो तुमसे फोन पर बात कर लूँ। मैंने जीतेन्द्र को कहा तुम आज क्या कर रहे हो तो जीतेन्द्र ने मुझे बताया कि मैं अपना बिजनेस शुरू कर चुका हूं। मैं और जीतेन्द्र एक दूसरे को काफी समय से जानते हैं मैंने जीतेन्द्र को कहा कि ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए प्लान बनाता हूं। जीतेन्द्र कहने लगा कि हां क्यों नहीं तुम मुझसे मिलने के लिए जरूर आना और फिर मैंने फोन रख दिया था। मैं घर पर पहुंचा तो मैंने देखा उस दिन घर पर मां नहीं थी मैंने पापा से कहा कि पापा मां कहां है तो वह मुझे कहने लगी कि वह पड़ोस में गई हुई है थोड़ी देर बाद आती ही होगी।

मैं भी अपने रूम में चला गया और मैं अपने कपड़े चेंज करने के बाद हॉल में बैठा हुआ था कि तभी मां भी आ गई। मां ने मुझे कहा कि आकाश तुम कब आए तो मैंने मां से कहा कि मां मैं थोड़ी देर पहले ही ऑफिस से लौटा हूं उस वक्त 8:00 बज रहे थे। मैं थोड़ी देर हॉल में ही बैठा हुआ था उसके बाद मैं रूम में चला गया। मैं जब रूम में गया तो उसके थोड़ी देर के बाद ही मां ने मुझे आवाज देते हुए कहा कि आकाश बेटा खाना खाने के लिए आ जाओ। मैं भी डाइनिंग टेबल पर बैठा हुआ था मां ने खाना लगा दिया था और हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया। डिनर करने के बाद मैं अपने रूम में आ गया और अगले दिन मुझे अपने ऑफिस जल्दी जाना था तो मैंने मां से कहा कि मुझे कल ऑफिस जल्दी जाना है। मां ने कहा कि ठीक है मैं तुम्हारे लिए कल सुबह जल्दी नाश्ता बना दूंगी। अगले दिन सुबह जब मैं तैयार हुआ तो मां मेरे लिए नाश्ता बना चुकी थी मां ने मुझे टिफिन दिया और कहा कि बेटा तुम ऑफिस से तो टाइम पर आ जाओगे। मैंने मां से कहा कि हां मां मैं ऑफिस से टाइम पर आ जाऊंगा।

पापा और मां को उनके किसी दोस्त के घर जाना था तो उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम टाइम पर आ जाना मैंने कहा कि ठीक है मैं जल्दी घर आ जाऊंगा। उस दिन जब मैं घर पहुंचा तो मां ने मुझसे कहा कि बेटा हम लोग रात तक लौट आएंगे मैंने मां से कहा कि ठीक है। मां ने मेरे लिए खाना बना दिया था और फिर वह लोग चले गए थे। मैं घर पर अकेला ही था तो मैंने खाना खाया फिर मैं अपने रूम में चला गया। मैं अपने फोन में अपनी कुछ पुरानी तस्वीर देख रहा था उसमें मुझे हर्षिता की तस्वीर दिखी। हर्षिता जो कि हमारे साथ कॉलेज में पढ़ा करती थी उससे मेरा काफी सालों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। ना तो मेरी उससे कोई बात हुई थी और ना ही मेरी उससे कोई मुलाकात हो पाई थी। मैंने उस दिन अपने दोस्त अंकित को फोन किया और जब मैंने उस दिन अंकित को फोन किया तो अंकित ने मुझे कहा कि मैं सोच ही रहा था कि मैं तुमसे बात करूँ।

मैंने अंकित को कहा कि अंकित क्या हम लोग कल मुलाकात कर सकते हैं तो वह मुझे कहने लगा कि हां क्यों नहीं और अगले दिन हम लोगों ने मिलने का फैसला किया। मैं अंकित को मिलकर काफी खुश था। अंकित से मैं काफी समय के बाद मिल रहा था लेकिन उससे मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा और अंकित भी बहुत ज्यादा खुश था। मैं उस दिन घर वापस लौट आया था और उस दिन मैंने हर्षिता का नंबर अंकित से ले लिया था। मैंने उस दिन हर्षिता को फोन किया हर्षिता से काफी समय बाद मेंरी बात हो रही थी इसलिए वह पहले तो मुझे पहचान ही नहीं पाई लेकिन फिर हर्षिता ने मुझे पहचान लिया था। अब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मैंने हर्षिता को कहा कि ऐसे ही तुम्हारे बारे में सोच रहा था तो मैंने अंकित से तुम्हारा नंबर ले लिया। हर्षिता मुझे कहने लगी कि तुमने बहुत ही अच्छा किया। हर्षिता अम्बाला में रहती है और उसने मुझे बताया कि वह वापस दिल्ली आ रही है। हर्षिता अम्बाला में नौकरी करती थी और अब उसकी नौकरी दिल्ली में लग चुकी थी।

हर्षिता बहुत ही ज्यादा खुश थी और मुझे भी बहुत ही अच्छा लगा जब उस दिन मैंने हर्षिता से फोन पर बातें की। हर्षिता से मेरी बात अब काफी दिनों तक हो नहीं पाई थी लेकिन जब वह दिल्ली आई तो उसने मुझे फोन किया। हर्षिता ने मुझसे मिलने की बात कही तो मैं उससे मिलने के लिए चला गया। जब मैं हर्षिता को मिलने के लिए गया तो उस दिन हर्षिता को देखकर मैं उसे पहचान ही नहीं पाया क्योंकि वह पूरी तरीके से बदल चुकी थी। हर्षिता पहले बहुत ही सिंपल थी लेकिन उस दिन हर्षिता को देख कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। हर्षिता अब पूरी तरीके से बदल चुकी है और उसके अंदर काफी बदलाव आ चुका था लेकिन अभी भी उसका स्वभाव पहले की तरह ही है। उस दिन हम दोनों ने एक दूसरे से जब मुलाकात की तो हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगा और मुझे भी इस बात की बड़ी खुशी थी कि हर्षिता और मैं एम दूसरे के साथ अच्छा समय बिता पा रहे थे। उस दिन के बाद हम लोगों का मिलना हमेशा ही होने लगा और हम दोनों जब भी एक दूसरे को मिलते तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगता। मैं हर्षिता से मिलकर बहुत खुश हूं हम लोगों की मुलाकातों का दौर बढ़ने लगा था। कहीं ना कहीं हम दोनों के बीच प्यार भी पनपने लगा था यही वजह थी कि मैं और हर्षिता एक दूसरे के साथ अब ज्यादा समय बिताने की कोशिश करने लगे थे।

हम लोग जब भी एक दूसरे के साथ में होते तो हम दोनों बहुत ही खुश होते। मैं और हर्षिता एक दूसरे से अपनी हर एक बात शेयर करने लगे थे। हर्षिता को मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा और जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ अपने रिलेशन को शुरू किया है वह हम दोनों के लिए बहुत ही अच्छा है। अब हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करने लगे हैं और मैं हर्षिता के साथ रिलेशन में बहुत ही खुश हूं।  हर्षिता और मैं रिलेशन में बहुत ही ज्यादा खुश हैं। हम दोनों के बीच प्यार बहुत ही ज्यादा है लेकिन अब कहीं ना कहीं मुझे और हर्षिता को एक दूसरे का साथ अकेले में समय बिताना अच्छा लगने लगा था। एक दिन मैं हर्षिता के घर पर गया हुआ था। उसने मुझे अपने घर पर बुलाया था। उस दिन ना जाने मेरे अंदर हर्षिता को लेकर क्या चल रहा था और हर्षिता भी इस बात से बड़ी खुश थी।

हम दोनों अकेले में समय बिता पा रही है लेकिन जब मैं अपने अंदर की गर्मी को रोक ना सका तो हर्षिता के होठों को मैं चूमने लगा। वह पूरी तरीके से गर्म होती चली गई और उसकी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ती चली गई।  वह उत्तेजित होती जा रही थी और मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ रही थी। मैंने  हर्षिता की चूत पर अपने लंड को घुसाते हुए अंदर की तरफ को घुसाना शुरू किया। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत को चिरता हुआ अंदर की तरफ गया तो उसकी चूत से खून की पिचकारी बाहर निकाल आई थी। जब उसकी चूत से खून निकला तो मेरे धक्के बहुत तेज हो रहे थे। मैं उसके दोनों पैरों को खोल कर उसे तेजी से धक्के देने लगा था और उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी। मेरी गर्मी भी बहुत ज्यादा बढ़ रही थी और मैं पूरी तरीके से गरम हो चुका था। हर्षिता भी बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी वह मुझसे कहने लगी मुझे और तेजी से सिसकारियां लो और मैं हर्षिता को तेज गति से धक्के दिए जा रहा था।

मैं जिस तेज गति से उसे चोद रहा था उससे मेरी आग बढ़ रही थी। वह पूरी तरीके से गरम हो चुकी थी मैंने हर्षिता की चूत के मजे बहुत देर तक लिए और उसकी चूत में मैंने अपने माल को गिराकर उसकी चूत की खुजली को शांत कर दिया था। मैंने जब हर्षिता की चूत में अपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई थी और मैं भी काफी ज्यादा खुश था। मैंने हर्षिता को घोड़ी बना दिया। उसे घोडी बनाने के बाद मैंने उसे चोदना शुरू किया तो उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड बहुत तेजी से हो रहा था। उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड आसानी से हो रहा था उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल रहा था और मुझे मजा आ रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया था अब मेरा माल उसकी चूत के अंदर हो चुका था।

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